Haar ki jeet hindi story
Haar ki jeet hindi story
हार की जीत की कहानी, (haar ki jeet hindi story) यह कहानी एक हार पर आधारित है जिसके बाद हार जीत में बदल जाती है, हम अगर कोशिश करते है तो हार को भी जीत में बदल सकते है, but यह तब ही संभव है जब आप उसके बारे में सोचते है और उसे पूरा करने के लिए मेहनत करते है तब ही ऐसा होता है,

गांव की वह प्रतियोगिता हर साल होती थी उसमे हर तरह के गांव से लोग आते थे और प्रतियोगिता को “जीतने” की पूरी कोशिश करते थे, जो वह “जीत” जाता था उसे विजेता घोषित किया जाता था, उसको इनाम में पुरे गांव में साल भर तक खाना खिलाया जाता था. उसकी सभी जरूरत को ध्यान में रखा जाता था, Because वह प्रतियोगिता को जीत जाता है तभी वह एक विजेता के तोर पर किसी भी गांव सेअपनी जरूरत का सामान ले लिया करता था एक तरह से वह पुरे सालभर राजा की तरह ही रहता था,
उसी गांव में एक लड़का जिसका नाम हरी था हरी का अगर हम सवभाव की बात करे तो वह बहुत अच्छा लड़का था मगर वह अकेला गांव में रहता था उसके परिवार में कोई भी नहीं था उसे खाने की समस्या भी बहुत थी Because उसके पास कोई भी जमीन नहीं थी, वह कुछ सब्जियों को बेचकर ही अपना घर चलाता था, वह भी उस प्रतियोगिता में भाग लेता था but हर बार “हार” जाता था, वह पूरी कोशिश करता था मगर उसे “हार” ही हाथ लगती थी, उसके लिए इस प्रतियोगिता को जितना बहुत जरुरी था but कैसे उसे कुछ भी नहीं पता था,
कोई राजा की तरह जीवन नहीं जीना चाहता है बल्कि अगर वह “जीतता” है तो वह उन गरीब बच्चो की भी मदद करता जोकि उसने बहुत बार देखा था but उसके लिए प्रतियोगिता को “जीतना” बहुत जरूरी था, वह पूरी तरह से मेहनत कर रहा था, वह यह भी देख रहा था की वह किस खेल में अच्छा कर सकता है, अगर कोई भी अपने खेल में बहुत कम समय में और सभी के फैसले के बाद विजेता चुना जाता है तो वही सच में “विजेता” होता था
दमी को अच्छे से दौड़ आती थी but उसमे वह हर साल से हार का सामना कर रहा था, वह जीतना चाहता था मगर वह कैसे “जीत” सकता था, उसके बारे में सोचकर वह अपनी दौड़ पर पूरी मेहनत कर रहा था, वह यही चाहता था की वह उस दौड़ को “जीत” पाए तभी उसे विजेता घोषित किया जा सकता था, वह हर रोज मेहनत करता था जिससे वह “जीत” पाए, हर रोज सुबह ही वह तैयारी में लग जाता था और उसके बाद कुछ सब्जियों को बेचने चला जाता था, दौड़ का दिन भी नजदीक आ गया था.
आज दौड़ का दिन था सभी लोग वहा पर आ गए थे Because आज प्रतियोगिता का दिन आ गया था, सभी गावो से लगभग पचास लोगो ने भाग लिया था सभी तरह के खेल वहा पर थे उस आदमी ने जैसा की वह दौड़ना चाहता था वही खेल उसने चुना था, सभी खेल धीरे-धीरे आरम्भ किये गए थे, सभी खेल में से एक विजेता को चुना जा रहा था, उसके बाद जब खेल के सभी “विजेता” आ जाते थे उसके बाद ही उनमे से एक “विजेता” को चुना जाता था, इस तरह खेल का विजेता चुना जाता था,
जब दौड़ शरू हुई तो वह आदमी अपनी दौड़ की शरुवात अच्छे से कर चूका था उसे यह भी लग रहा था की आज वह दौड़ को जीत” सकता है, जब वह दौड़ रहा था तभी उसने पास की नदी में एक बच्चे को डूबता हुए देखा था, सभी दौड़ने वालो का ध्यान सिर्फ अपनी दौड़ पर था, Because भी उस तरफ ध्यान नहीं दे रहा था. but वह आदमी अपने आपको नहीं रोक पाया था उसके बाद वह रुका और उस बच्चे को निकलने चला गया था, सभी लोग उसी और जाने लगे थे, उसने उस बच्चे को बचा लिया था,
जब उसने देखा की दौड़ अब खत्म हो चुकी थी, उस दौड़ में उसकी हार हो गयी थी, इस बार वह “हार” चूका था वह जानता था की उसने अपनी दौड़ के लिए बहुत मेहनत की थी but सारी मेहनत बेकार हो चुकी थी, उसके बाद सभी को वही पर बुलाया गया था, उनमे से एक आदमी बोला की विजेता दौड़ में कौन होगा यह फैसला अभी तक नहीं हुआ है, जब तक फैसला नहीं होता है तब तक इंतज़ार करना होगा, सभी लोग वही पर बैठ गए थे, कुछ गांव वाले भी वही पर यही सोच रहे थे की ऐसा क्या हुआ था,
मगर उसे विजेता नहीं माना जा सकता था but सभी लोग यही कहने लगे की ऐसा क्यों हो रहा है जब की वह जीता है उसे ही “विजेता” बनाया जाए but फैसला उस आदमी की और गया था जिसने उस बच्चे को बचाया था, सभी का यह मानना था, की अगर हम इंसान खेल को ही महत्व देते है तो हम एक खेल में तो “जीत” सकते है but इंसानियत में शायद हम “हार” सकते है. अगर यह आदमी भी खेल के बारे में सोचता तो क्या हम बच्चे को बचा पाते,हीं है जीतना एक इंसानियत में “जीतना” जरुरी होता है, इसलिए इस खेल का विजेता हम उसी आदमी को बनाते है, वही सच्चा विजेता है और उसे ही विजेता बनाया गया था, उसके बाद सभी “विजेता” में एक को चुनना था जोकि वोट डालने पर होता था, जिसकी ज्यादा वोट वही जीतता था, जब वोट का खोला गया था सभी वोट उसी आदमी की और थी
Because असल में वही सच्चा विजेता था, जो न जीत कर भी जीत चूका था आज उसका सपना जो शायद कभी पूरा भी नहीं हो सकता था आज पूरा हो गया था, उसने वही किया जो उसे अच्छा लगता था, आपको यह हार की जीत की कहानी, (haar ki jeet hindi story) कैसी लगी, हमे जरुरी बताये और अगर आपको लगता है की यह बात सही है तो आप इस कहानी को जरूर शेयर करे.
यह “हार” और जीत” की कहानी जब शुरू हुई थी जब वह आदमी हमेशा अपने साथी को यह बात बताया करता था की वह उसे हरा सकता है लेकिन उसका साथी इन सभी बातों पर यकीन नहीं करता था, वह तो यही जानता था जीवन में “हार” और “जीत” से कोई मतलब नहीं है, एक दिन उस आदमी का साथी अपने दोस्त से मिलने आया था, वह उससे बात करता है की तुम मुझसे किस बात से परेशान हो क्योकि मुझे नहीं लगता है की हमे “हार और जीत” की बात करनी चाहिए,
वह पहला आदमी कहता है की तुम्हारी वजह से सभी लोग मुझे गलत समझते है इसलिए मुझे लगता है की सभी तुम्हे पसंद करते है, क्योकि उस दिन की बात मुझे याद है जब में अपने खेत में काम कर रहा था, तुम आये थे उसके बाद सभी लोगो को तुम्हारी बात पसंद आयी थी, मेरी बात किसी ने नहीं सुनी थी, मुझे तभी से लग रहा था की जब तक तुम्हे “हरा” नहीं देता तब तक मुझे अच्छा नहि लगेगा यह सुनकर दुसरा आदमी कहता है जोकि उसका बहुत अच्छा दोस्त है, तुम्हे इस बात से फर्क पड़ गया है,
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